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Parivar niyojan par essay Family planning

Parivar niyojan par essay

परिवार मानव की वह संस्था है जिसकी स्थापना मानव ने सृष्टि की रचना के साथ ही कर ली थी। परिवार में रहने के कारण सुख शांति के अलावा एक अलग ही प्रकार का आनंद प्राप्त होता है। जन्म से ही प्रत्येक व्यक्ति को समाज में जीवन यापन करने हेतु परिवार के सहयोग की बड़ी आवश्यकता पड़ती है इसलिए परिवार को एक सामाजिक संस्था भी कहा गया है। परिवार का प्राचीन स्वरूप आज भी शहरों की अपेक्षा गांवों में फिर भी देखने को मिल जाता है। आज भी गांवों में बड़े परिवार होते हैं, परिवार के सभी सदस्यों में एक दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना देखने को मिलती है। इसके उल्टे शहरों में आज देखा जाता है कि परिवार लगातार छोटे होते जा रहे हैं। परिवार के सदस्यों में एक दूसरे से आग निकलने की होड़, ईर्ष्या ने परिवारों में फूट डाल दी है। परिवार के सदस्यों में एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना लगातार क्षय होती जा रही है। परिवार में रहने के क्या फायदे हैं यह वही लोग जान सकते हैं जो आज भी संयुक्त परिवार में रहते हैं। वर्तमान में संयुक्त परिवार की अवधारणा लोगों में खत्म होती जा रही है। परिवार का स्वरूप अनियंत्रित तथा अव्यवस्थित होता जा रहा है जिसके घातक परिणाम देश और समाज को भविष्य में भुगतने पड़ सकते हैं। ऐसे में परिवार नियोजन का प्रश्न केवल परिवार कल्याण न होकर देश के सामाजिक व आर्थिक हित के लिए भी काफी फायदेमंद है।

विश्व की जनसंख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है जबकि पृथ्वी पर मौजूद संसाधन सीमित मात्रा में ही उपलब्ध हैं इसलिए प्राकृतिक संसाधनों की दिन-ब-दिन कमी होती जा रही है। विद्वानों व विशेषज्ञों का कहना है कि जनसंख्या बढ़ने की रफ्तार यही रही तो एक दिन ऐसा आ जाएगा कि मनुष्य को रहना तो दूर पृथ्वी पर खड़े होने के लिए स्थान नहीं मिल पाएगा। इसलिए जरूरी है कि बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगायी जाए। सौ वर्ष में ही जनसंख्या बढ़कर दोगुनी हो गयी है। वर्तमान दौर में मानव जीवन संघर्षमय व अशांत चल रहा है। जनसंख्या वृद्धि के कारण युवाओं में लगातार असंतोष छा रहा है। जनसंख्या वृद्धि के कारण बेरोजगारी, गरीबी और भूखमरी बढ़ती ही जा रही है। इन सब समस्याओं के कारण कई बार हमें आत्महत्याएं जैसी निंदनीय समाचार सुनने को अक्सर मिलते ही रहते है। यदि इसी रफ्तार से जनसंख्या बढ़ती गयी तो आगे चलकर मानव की स्थिति क्या होगी इस बात का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। हमारे देश में बढ़ती जनसंख्या की समस्या सबसे विकट समस्या है।

हमारे यहां आबादी बड़ी तेजी से बढ़ रही है। जनसंख्या के हिसाब से हमारे देश का विश्व में दूसरा नंबर है, जिस प्रकार से हमारे देश की आबादी बढ़ रही है उस हिसाब से कुछ वर्षों बाद हमारा जनसंख्या के मामले में पहला नंबर हो जाएगा। 1981 में देश की जनसंख्या 65 करोड़ 50 लाख थी जो कि 2001 में बढ़कर सौ करोड़ या एक अरब से ऊपर हो गयी है। आबादी बढ़ने के कारण हमें परिवार नियोजन की आवश्यकता हुई। यह केवल एक परिवार की भलाई के लिए नहीं है बल्कि संपूर्ण देश की आर्थिक तथा सामाजिक प्रगति के लिए जरूरी है। सीमित परिवार की व्यवस्था आसानी से हो सकती है। जितने ज्यादा सदस्यों का परिवार होगा उसमें उतनी अव्यवस्था होगी। बड़े परिवार की तुलना में छोटा परिवार अपनी सीमित आवश्यकताओं वाला परिवार होता है। इसके सदस्य सीमित होते हैं। इसलिए उसकी आवश्यकताएं एवं खर्च भी कम होते हैं। छोटे परिवारों में किसी बात को लेकर रजामंदी भी बड़े परिवार के बजाय जल्दी हो जाती है। दु:ख-सुख में हाथ बंटाने का अवसर बड़े परिवारों की अपेक्षा छोटे परिवारों में अधिक मिलता है क्योंकि परिवार के सदस्य कम होने के कारण एक दूसरे का दु:ख सुख समझने में तनिक भी देर नहीं लगती। यही कारण है कि बड़े परिवारों की अपेक्षा छोटे परिवारों में रोटी, कपड़ा और मकान की समस्या इतनी ज्यादा नहीं होती। इस तरह छोटा परिवार बड़े परिवार की अपेक्षा अधिक सुखी और श्रेष्ठ होता है।

किसी भी परिवार का संबंध समाज से होता है। समाज का संबंध राष्ट्र से होता है। इस प्रकार परिवार का दुख समाज का और समाज का दुख राष्ट्र का होता है। इस कारण भी परिवार को सुखी और संपन्न बनाने की आवश्यकता निरंतर बनी रहती है। बच्चों की शिक्षा-दीक्षा उनके भावी जीवन के पथ निर्माण का उत्तरदायित्व माता-पिता पर ही होता है। इसलिए जिस व्यक्ति के जितने बच्चे कम होंगे उसकी चिंता उतनी कम होगी। मानसिक दृष्टि से भी परिवार नियोजन कम महत्वपूर्ण नहीं है। परिवार नियोजन से केवल एक व्यक्ति का और एक परिवार का ही कल्याण नहीं होता अपितु उससे देश, समाज और मानवता का भी हित होता है। परिवार नियोजन से मनुष्य को ही अनेक लाभ होंगे। वह अपना जीवन सुखी, स्वस्थ और शांत व्यतीत कर सकेगा।

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