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Essay on doctor in Hindi डॉक्टर पर हिंदी में निबंध

Essay on doctor in Hindi

पृथ्वी पर मनुष्य का जीवन कई तरह के अनुभवों, घटनाओं और संघर्षों से भरा हुआ रहता है। मनुष्य के जीवन में मनुष्य को कई बार आनन्द और सुख की अनुभूति होती है तो कई बार दुःख से भी उसका पाला पड़ता है। इन सारी घटनाओं के बीच में मनुष्य के लिए यह बहुत आवश्यक है कि उसका शरीर स्वस्थ हो। अगर मनुष्य का शरीर दुर्बल होगा या किसी बीमारी से ग्रसित होगा तो वह जीवन के संघर्षों में कभी भी सफलता नहीं प्राप्त कर सकता है।

इन्हीं विषम अनुभवों, दुखों और संघर्षों के बीच में निरंतर जीवन चलता रहता है। दिन और रात प्रत्येक के जीवन का मूल चक्र है। बीमारी मानव के जीवन का एक तत्व है और संपूर्ण विश्व में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो दूसरों को पीड़ा मुक्त करते है। चिकित्सक का पद हमारे समाज में सम्मानजनक पदों में से एक है। चिकित्सक को समाज में भगवान का दर्जा भी प्राप्त है।

चिकित्सक का कार्य आसान नहीं अपितु बहुत ही कठिन है। एक चिकित्सक को पूरी निष्ठा के साथ रोगियों की देखभाल करनी पड़ती है। रोगियों की तकलीफों को ध्यान से सुनकर उनके रोग का पता लगाने के बाद, रोगी की बीमारी का उचित उपचार मुहैया कराना पड़ता है। रोग के उपचार में कोई भी लापरवाही रोगी के शरीर में गलत प्रभाव भी डाल सकती है, इसका खामियाजा रोगी के साथ साथ बाद में डॉक्टर को भी भुगतान पड़ सकता है जैसे- गलत उपचार संबंधी कचहरी केस। कई बार तो ऐसा भी देखने को मिलता है कि जब किसी जघन्य बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को बीमारी से मुक्ति नहीं मिल पाती है तब उसके परिजनों का गुस्सा भी डॉक्टरों को भारी पड़ता है जबकि उपचार में या उपचार के तरीकों में चिकित्सक या डॉक्टर्स की कोई गलती नहीं होती।

चिकित्सक अपना संपूर्ण जीवन रोगियों को समर्पित कर देता है। चिकित्सक मानवता के दर्द और पीड़ा का अनुभव करता है। वह उनकी रोगों से रक्षा करता है। वह दूसरों के जीवन को बेहतर और स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए संघर्ष करता रहता है। चिकित्सक बीमारियों के फैलने को रोकने का कार्य करता है। यह चिकित्सक ही है जो रोगियों के लिए उपचार खोजता है। कभी कभी यह किसी विशेष रोग के उपचार के लिए वर्षों तक खोज करता रहता है। अन्त में, वह सफल भी हो जाता है। निष्कर्ष के अनुसार हम पाते हैं कि औषधि और शल्य हमारी कल्पना से कहीं आगे निकल चुके हैं। आज चिकित्सा के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने काफी प्रगति कर ली है। चिकित्सा के क्षेत्र में अब तो क्षतिग्रस्त अंग जैसे, हृदय, फेफड़े और वृक्क का अन्यत्र रोपण किया जा सकता है। वर्तमान में चिकित्सक मानव खोपड़ी के अन्यत्र रोपण की कोशिश में लगें हुए हैं। इस प्रकार चिकत्सा के क्षेत्र में आज दिखाई देने वाली प्रगति चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों और चिकित्सकों के प्रयासों द्वारा ही सफल हो सके हैं।

चिकित्सक का जीवन बहुत कठिन है और परिश्रमों से परिपूर्ण है। चिकत्सक का जीवन इतनी व्यस्ततापूर्ण होता है कि वह अक्सर खाना खाते समय, आराम करते समय भी रोगी को देखता है। कभी-कभी चिकित्सा में घायल हुए व्यक्तियों, दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों के उपचार के लिए पूरे दिन ही कार्य करना पड़ता है। वैसे तो हम सब ही कभी न कभी अपने जीवन में कार्य से अवकाश ले सकते हैं लेकिन एक चिकित्सक के लिए यह अवकाश बड़ी ही मुश्किल से उपलब्ध हो पाता है क्योंकि चिकित्सक को अस्पतालों में अक्सर आपातकालीन केस देखने पड़ते हैं। इन आपातकालीन मरीजों की वजह से अक्सर ही चिकित्सक ओवरटाइम देना पड़ता है।

एक चिकित्सक सदैव अपने रोगियों के साथ प्रसन्नता से व्यवहार करते हैं ताकि रोगियों को किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव से दूर रखा जाय और वे ज्यादा से ज्यादा स्वस्थ होने के लिए आशाप्रद रहें। चिकित्सक बीमार व्यक्ति को बीमारी से लड़ने के लिए उत्साहित करते हैं ताकि वे अपनी इच्छाशक्ति के द्वारा जल्दी से जल्दी स्वस्थ हो सकें। चिकित्सक, किसी रोगी के जीवन में शक्ति और आशा का एक स्त्रोत है। किसी बेचैनी व अकुलाहट में भी डॉक्टर्स का प्रथम कर्तव्य मरीज का उपचार करना ही होता है। एक चिकित्सक सदैव ही अपनी उस सौगन्ध को याद करता है, जो उसे दीक्षांत समारोह के समय दी जाती है।

भारत में, मानवता की सेवा करना एक लम्बी परम्परा रही है। यह प्रत्येक संस्कृति और प्रत्येक धर्म में पाया जाता है। भारतीय चिकित्सक अपने दानी लक्षण, समर्पण, कठिन परिश्रम के कारण प्रसिद्ध होते हैं। इनकी सम्पूर्ण विश्व में भारी माँग है। अनेक भारतीय चिकित्सक प्रसिद्ध विदेशी अस्पतालों में कार्य कर रहे हैं। भारत में सबसे अधिक चिकित्सक हैं। यहाँ लगभग 350 मेडिकल कॉलेज हैं जिनसे लगभग प्रतिवर्ष 35,000 चिकित्सक निकलते हैं। वे प्रत्येक शहर, गाँव, बड़े अस्पतालों और स्वयं के अस्पतालों में कार्यरत हैं। हाल ही के वर्षों में भारतीय अस्पतालों में आधुनिकीकरण प्रवेश कर चुका है। यहाँ अब उपचारों के लिए विशेष प्रकार के उपकरण लगाए जा चुके हैं।

ऐलोपेथिक पद्धति के अतिरिक्त भारत में चिकित्सक अब आयुर्वेदिक होम्योपैथिक, यूनानी पद्धतियों पर भी अभ्यास कर रहे हैं और इन क्षेत्रों में काफी प्रगति कर ली है और अभी भी निरंतर प्रगतिशील हैं। फिर भी आज भारत में अधिकतर चिकित्सक ऐलोपथिक पद्धति के मिलते हैं। यहाँ अनेक स्थानीय चिकित्सक होते हैं जो पारम्परिक पद्धति के आधार पर कार्य करते हैं। पारंपरिक पद्धति जैसे योगा और आयुर्वेद इन दिनों अधिक प्रचलित हो रहे हैं। चिकित्सक का सम्पूर्ण उद्देश्य मानवता की सेवा करना और उसकी पीड़ाओं को दूर करना ही है। वास्तव में चिकित्सक हमारे समाज का महत्वपूर्ण अंग होता है और जिस तरह से वह लोगों की जान बचाता है, रोगों से उन्हें मुक्ति दिलाता है, वह किसी भगवान से कम नहीं है।

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