alessays

Let's explore our knowledge!

एक और एक ग्यारह Hindi short storyएक और एक ग्यारह hindi short story

एक बार की बात हैं किसी जंगल में एक पागल हाथी ने भारी तबाही मचा रखी थी। वह अपनी ताकत के घमंड में चूर था और किसी भी दूसरे जानवर को अपने आगे हीन समझता था। जंगल में एक पेड पर एक चिडिया व चिड़े रहते थे। चिडिया अंडो पर बैठकर अपने प्यारे बच्चों के निकलने के सुनहरे सपने देखती रहती थी। एक दिन क्रूर हाथी गरजता हुआ आया और उस पेड़ तोड डाला जिससे चिड़िया का घोंसला नीचे आ गिरा। अंडे टूट गए और ऊपर से हाथी का पैर उस पर पड़ गया, अंडे फूट गए। बेचारी चिड़िया वहीं जोर जोर से रोने लगी। तभी वहां कठफोठवी आई। वह चिडिया की अच्छी मित्र थी। कठफोडवी सारी कहानी जानने के बाद कहा गम में डूबे रहने से कुछ नहीं होगा। उस हाथी को सबक सिखाना होगा। चिडिया ने कहा हम उस विशाल हाथी का कुछ नहीं कर सकते। कठफोडवी ने समझाया सब मिलकर उसका मुकाबल करेंगे। मेरा एक मित्र वींआख नामक भंवरा हैं। हमें उससे इस बारे में पहले सलाह लेना चाहिए।  चिडिया और कठफोडवी दोनों भंवरे से मिलीं। भंवरा गुनगुनाया- यह तो बहुत बुरा हुआ। मेरा एक मेंढक मित्र है उससे सहायता लेनी होगी। अब तीनों मेढक के पास पहुंचे। भंवरे ने सारी कहानी बताई। मेंढक टर्राते हुए आवाज में बोला- आप लोग धैर्य से मेरी यहीं मेरी प्रतीक्षा करें। मैं गहरे पानी में बैठकर सोचता हूं। इसके आधे घंटे बाद वह पानी से बाहर आया और वह बोला- दोस्तो! उस हत्यारे हाथी को सबक सीखाने की मेरे दिमाग में एक बडी अच्छी योजना आई है। उसमें सभी का योगदान होगा।

मेंढक ने इसके बाद योजना बताई, योजना सुनकर सभी खुशी से उछल पडे। अगले दिन सब अपनी जगह पर योजना अनुसार व्यस्त हो गए। हाथी आया और पास ही खड़े एक पेड़ को गिराने के लिए खूब जोर जोर से हिलाने लगा। इसी बीच भंवरा हाथी के कानों के पास जाकर मधुर राग गुंजाने लगा। राग सुनकर हाथी मस्त होकर आंखें बंद करके झूमने लगा। तभी कठफोडवी वहां आई और अपनी सुई जैसी नुकीली चोंच से उसने हाथी की दोनों आंखें फोड़ डाली। हाथी तडपने लगा और इधर-उधर भागने लगा। इस पर हाथी का क्रोध बढ़ गया। वह और उत्पात मचाने के लिए इधर उधर भटकने लगा। आंखों से नजर न आने के कारण ठोकरों और टक्करों से उसका शरीर जख्मी होता जा रहा था। जख्म से वह हाथी चिल्लाने लगा। एक तो आंखों में जलन और ऊपर से चिल्लाते-चिंघाडते हाथी का गला सूख गया। अब हाथी को तेज प्यास लगने लगी। अब उसे केवल पानी की तलाश थी। मेढक ने अपने बहुत से साथी मेढ़कों को एकत्र किया और उन्हें ले जाकर दूर बहुत बडे गड्ढे के किनारे बैठकर टर्राने के लिए कहा। सारे मेढक एक साथ मिलकर एक गड्ढे में टर्राने लगे। मेढक की टर्राहट सुनकर हाथी ने सोचा पानी पास में ही है क्योंकि मेंढक तो पानी में ही रहता है। प्यासा हाथी तेजी से भागा। जैसे ही हाथी गड्ढे के पास पहुंचा, मेढकों ने पूरा जोर लगाकर टर्राना शुरु किया। हाथी आगे बढा और गड्ढे में गिर गया, जहां उसकी गिरने से मृत्यु हो गई।

सीखः 1.एकता में बल हैं।

2.अहंकारी का देर या सबेर अंत होता ही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *